अगर किसी ने मुझे गदहा कहा
तो मुझे खुद पे गर्व होगा
आखिर किसी ने मेरे
सीधेपन और सहिष्णुता की पहचान की तो की।
किसी को कुत्ता कहना
उसकी वफादारी को सही आंकना है
अब तो मानव
कुत्ता कहलाने के भी काबिल नहीं रहा
वह तो खिलानेवाले को ही
काटने दौड़ता है सबसे पहले।
साँप
दूध और डंडा में
अंतर नहीं समझता है
जो भी सामने आए
उसी पर दंश छोड़ता है
इसीलिए इसकी तुलना
आदमी से की जाने लगी है।
सबसे बड़ा अपमान मुझे
आदमी कहलाना लगता है
जो अंदर और बाहर
जहर ही जह रखता है
सियार, चील और घडिय़ाल
की बिसात ही क्या
यह गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलता है।
- विपिन बादल
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शनिवार, 8 अगस्त 2009
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