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सोमवार, 8 मार्च 2010

बाजार तो हद पार कर रहा

आज हमारे-आपके हर क्रिया-कलाप बाजार से संबद्घ है। हम क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, क्या करते हैं - सब बाजार तय करने लगा है। महानगरों से शहर और शहर से गांव - हर जगह यही हाल है। और बाजार है कि सुरसा की भांति अपना दायरा बढ़ाता ही जा रहा है। न कोई नैतिकता, न कोई संवेदना। केवल है तो बस बाजार। माल और ग्राहक का रिश्ता। और जब ये बनता है तो किसी भी हद की बात करनी ही बेमानी है।
तभी तो आजकल कण्डोम, जिसका उच्चारण भी सार्वजनिक जगहों पर करने से कई लोग कतराते हैं, उसका इस्तेमाल रोजमर्रा की चीजों में हो रहा है। कोई आश्चर्य नहीं। पुरूष कण्डोम से महिलाओं के लिए बालों में लगाने वाले रबर बनाए जा रहे हैं तो महिला कण्डोम से चूडिय़ाँ। ऐसा नहीं है कि इसके लिए फ्रेश कण्डोम का इस्तेमाल हो रहा है। बल्कि प्रयोग के बाद परित्यक्त कण्डोम का प्रयोग होता है।
सच तो यही है कि चीन में हेयर बेंड उपयोग में लाए गए कंडोम और धागो से बनाई जाने लगी है। तभी तो वह दूसरे देशों में अपने उत्पदों को इतना सस्ता करके बेच रहा है। मालूम है यह पढकर आप को खिन्न महसूस हो रहीं होगी... .लेकिन दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि यह सत्य है...
कुछ समय पूर्व बीजिंग के एक अखबार में समाचार एजेंसी एएफपी के हवाले से तो यही कहा गया था कि दक्षिणी चाईना में उपयोग में लाए गए कंडोम से बनी हेयर बेंड यहाँ के लोगो के बीच में यौन संबंधित बिमारियों को बढ़ाने का काम कर रही है। चाईना के स्थानीय अखबारों के अनुसार यहाँ के दक्षिणी गुएन्गडोंग प्रांत के डोनगुएन और गुएन्गजोउ शहर की स्थानिय बाजार से प्राप्त यह रबर बेन्ड को जब खोला गया तो उसमे सें उपयोग किए गए कंडोम मिल आए... अखबार ने कहा कि 'सस्ती कीमतमें बिकने वाले यह रंगबिरंगी हेयर बेंड की यहाँ सेलिंग बहुत बढिय़ा है.. चूँ कि यह हेर बेन्ड उपयोग में लाए गए कंडोम से बनाई जाती है जिस के कारण उसमें अभी भी बेक्टेरिया और वाईरस रहते हैं। यहाँ कि महिलाएं यह भी नहीं जानती कि जब वह अपनी चूँटिया बनाने के लिए जब यह हेयर बेंड एक हाथ और मुह से खोलकर जब अपने बाल पर लगाती है तो न चाँहते हुए भी उनके मुह में बिमारी के वायरस दाखिल हो जाते हैं। सच तो यह भी है कि 10 हेयर बेन्ड की कीमत 25 फेन ( तीन सेन्ट) है जो अन्य बाजार कि तुलना में बहुत सस्ती है। यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी भी कह रहे है कि रबर के बदले हेयर बेन्ड में उपयोग में लाए गए कंडोम का ईस्तेमाल गैरकानूनी है।
ये तो हुई चीन की बात। जरा दूरी तय करें तो जिम्बावे में महिला कण्डोम से चूडिय़ां बनाने की खबर आई है। जि़म्बाब्वे में कुछ व्यापारियों ने मुनाफ़ा कमाने एक ऐसा अनोखा तरीक़ा निकाला है जिसके बारे में कुछ लोगों का कहना है कि इससे उनकी रचनात्मकता भी झलकती है। ये रचनात्मक तरीक़ा है महिला कंडोम के छल्लों को चूडिय़ों की शक्ल देकर ग्राहकों को आकर्षित करना। दरअसल, कुछ व्यापारियों ने महिलाओं द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कंडोम के रंग-बिरंगे रबर के छल्लों से चूडिय़ाँ बनानी शुरू कर दी हैं और इनकी बिक्री में ख़ासी कमाई हो रही है.
दुकानदारों के लिए तो यह धंधा ख़ूब फल-फूल रहा है लेकिन जो लोग अनुदान का सहारा लेकर बनाए गए इन कंडोम को बाँटने का काम करते हैं, उनका कहना है कि इस धंधे पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। राजधानी हरारे में एक दुकानदार का कहना था, ये छल्ले बहुत ख़ूबसूरत हैं। उन्हें पहनना मुझे बहुत अच्छा लगता था लेकिन जब मुझे पता चला कि उन्हें कंडोम से बनाया गया तो मैंने उन्हें तुरंत फेंक दिया। हमें ये कंडोम अस्पतालों और क्लीनिक से मुफ़्त मिलते हैं। हम उनका प्लास्टिक काटकर फेंक देते हैं और छल्ला निकाल लेते हैं। इन छल्लों को हम तरह-तरह के रंगों जैसे कि- गुलाबी, पीले और लाल रंगों में रंग लेते हैं।
दरसअल, सरकार एचआईवी-एड्स के ख़िलाफ़ अभियान के तहत कंडोम लोगों को मुफ़्त बाँटती है। एक अनुमान के मुताबिक़ जि़म्बाब्वे के कऱीब 25 प्रतिशत वयस्क एचआईवी से संक्रमित हैं। जि़म्बाब्वे दक्षिण अफ्रीका में एक ऐसा देश है जहाँ महिला कंडोम बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किए जाते हैं और हर साल कऱीब दस लाख कंडोम इस्तेमाल होते हैं। एक सहायता एजेंसी पॉपुलेशन सर्सिसेज़ इंटरनेशनल (पीएसआई) महिला कंडोम दवाई की दुकानों और ब्यूटी सैलूनों में बाँटती है। पीएसआई की एक कार्यकर्ता का कहना है कि महिला कंडोम पुरुष कंडोम के मुक़ाबले ज़्यादा महंगे बनते हैं इसलिए दानकर्ता देशों का दबाव है कि महिला कंडोम का इस्तेमाल सही तरीक़े से होना चाहिए।